उल्हासनगर में अवैध ऑनलाइन लॉटरी का फिर से बोलबाला, सरकार और प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।



उल्हासनगर : नीतू विश्वकर्मा
महाराष्ट्र में उल्हासनगर और इसके आसपास के इलाकों में अवैध ऑनलाइन लॉटरी का कारोबार एक बार फिर तेजी से पैर पसार रहा है। यह गोरखधंधा न केवल राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व से वंचित कर रहा है, बल्कि जीएसटी विभाग और प्रशासनिक प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
कैसे चल रहा है यह अवैध धंधा?
जानकारी के मुताबिक, इस अवैध कारोबार को चलाने वाले लोग कुछ पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित विभागों को कथित तौर पर आर्थिक लाभ पहुंचाकर अपनी गतिविधियां बेखौफ तरीके से संचालित कर रहे हैं। इस अवैध लॉटरी नेटवर्क में टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इसे बंद करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
विधायकों ने पहले भी उठाई थी आवाज
कुछ वर्ष पूर्व अंबरनाथ के विधायक बालाजी किनिकर ने विधानसभा में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने का आदेश जारी करते हुए सख्त निर्देश दिए थे कि जहां कहीं भी लॉटरी का संचालन होता पाया गया, वहां के पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाएगा।
फिर भी क्यों नहीं रुका अवैध धंधा?
उल्हासनगर के विधायक कुमार ऐलानी ने भी इस गोरखधंधे के खिलाफ मुख्यमंत्री से कई बार कार्रवाई की मांग की थी। इसके बावजूद, यह कारोबार अब फिर से सक्रिय हो गया है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि इस अवैध नेटवर्क के पीछे गहरी साजिश और बड़ी ताकतें काम कर रही हैं।
विधानसभा सत्र में उठ सकता है बड़ा मुद्दा
अब सवाल उठता है कि अधिवेशन में क्या विधायक कुमार ऐलानी इस गंभीर मुद्दे को फिर से उठाएंगे? क्या सरकार इस अवैध धंधे पर सख्त कार्रवाई करेगी, या यह मामला फिर अनदेखा कर दिया जाएगा?
सरकार और प्रशासन पर गहरा सवाल
इस अवैध गतिविधि से राज्य सरकार को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हो रहा है। अगर समय पर इसे रोका नहीं गया तो इसका असर न केवल सरकारी राजस्व पर पड़ेगा, बल्कि समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
क्या है जनता की उम्मीद?
जनता अब सरकार से जवाब और ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और प्रशासन पर भारी दबाव है कि वे इस अवैध कारोबार को तुरंत बंद करने के लिए कठोर कदम उठाएं।
अगर अब भी कार्रवाई में देरी हुई, तो यह मामला न केवल राजनीतिक मुद्दा बनेगा बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।