मीरारोड में मेराकी थाई स्पा की आड़ में सेक्स रैकेट का पर्दाफाश, मुख्य आरोपी अब भी फरार।

मीरारोड: नीतू विश्वकर्मा
महाराष्ट्र के मीरारोड में पुलिस ने मेराकी थाई स्पा की आड़ में चल रहे सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, इस घिनौने धंधे का सरगना सैम्पीटर सुलेमान नाडर और उसका सहयोगी विवेक अच्छेलाल वर्मा अब भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
मसाज के नाम पर नाबालिगों से कराया जाता था देह व्यापार
सूत्रों के अनुसार, आरोपी सैम्पीटर सुलेमान नाडर और विवेक अच्छेलाल वर्मा स्पा में नाबालिग लड़कियों को मसाज थेरेपिस्ट के तौर पर काम पर रखते थे और जबरन देह व्यापार करवाते थे। जब मीरारोड पुलिस को इस गोरखधंधे की जानकारी मिली, तो उन्होंने स्पा पर छापा मारा और रंगे हाथ कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया। हालांकि, सैम्पीटर सुलेमान नाडर पुलिस की गिरफ्त से बचकर फरार हो गया।
छापेमारी के दौरान वह कथित रूप से स्पा के काउंटर पर मौजूद था, लेकिन इसके बावजूद वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इस घटना ने पुलिस प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या उसे भागने में किसी ने मदद की? या फिर पुलिस ने जानबूझकर उसे बच निकलने का मौका दिया? इन सवालों के जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं हैं।
बांग्लादेशी तस्करी रैकेट से जुड़े होने का शक
जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण मामला नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को संदेह है कि सैम्पीटर सुलेमान नाडर और विवेक अच्छेलाल वर्मा बांग्लादेश से अल्पवयस्क लड़कियों की तस्करी कर उन्हें मुंबई, ठाणे, मीरारोड और उल्हासनगर के होटलों, स्पा और डांस बार में सप्लाई करते थे।
मेराकी थाई स्पा की तीन शाखाएं हैं— दो मीरारोड में और एक ठाणे के तलावपाली इलाके में। यही नहीं, आरोपी नाडर स्पा और लॉज मालिकों को बांग्लादेशी लड़कियां सप्लाई करने के अवैध धंधे में भी शामिल था।
एनजीओ और पत्रकारिता की आड़ में संगठित अपराध
इस रैकेट को और अधिक भयावह बनाने वाली बात यह है कि सैम्पीटर सुलेमान नाडर खुद को गैर-सरकारी संगठन (NGO) संचालक और कभी-कभी यूट्यूब पत्रकार बताकर पुलिस और प्रशासन को धोखा देता था। उसके पास एक यूट्यूब न्यूज चैनल का आईडी कार्ड भी है, जिसकी मदद से वह अन्य स्पा, लॉज और डांस बार मालिकों को धमकाकर उनसे उगाही करता था।
परिवार भी संदेह के घेरे में
मामले की जांच कर रही पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ महीने पहले, सैम्पीटर सुलेमान नाडर की पत्नी ने 20 लाख रुपये लेकर 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ फरार होने की शिकायत दर्ज करवाई थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आरोपी नाबालिग लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेलता था।
संगठित गिरोह का पर्दाफाश, केवल एक व्यक्ति नहीं शामिल
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि सैम्पीटर सुलेमान नाडर अकेला इस गोरखधंधे को नहीं चला रहा था, बल्कि यह एक बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा है। बांग्लादेशी कनेक्शन और मानव तस्करी जैसे अपराध किसी एक व्यक्ति द्वारा संभव नहीं होते, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत आपराधिक नेटवर्क काम कर रहा है।
पहले भी दर्ज हो चुका है मामला
यह पहली बार नहीं है जब सैम्पीटर सुलेमान नाडर का नाम किसी आपराधिक गतिविधि में सामने आया हो। कुछ महीने पहले, नारपोली पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ ठगी का मामला भी दर्ज किया गया था। बताया जाता है कि उसने एक चर्च के लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया था।
पुलिस कार्रवाई जारी, फरार आरोपियों की तलाश तेज
फिलहाल, पुलिस इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। यदि बांग्लादेशी तस्करी के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला अंतरराष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में आ सकता है और संबंधित एजेंसियां भी जांच में शामिल हो सकती हैं।