उल्हासनगर मध्यवर्ती अस्पताल के जिला शल्यचिकित्सक (सर्जन) डॉ. मनोहर बनसोडे के साथ कल्याण ट्रैफिक पुलिस द्वारा अपमानजनक व्यवहार, जांच और कार्रवाई की मांग।

उल्हासनगर : नीतू विश्वकर्मा
महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य सेवा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. मनोहर बनसोडे, जिला शल्यचिकित्सक (सर्जन), मध्यवर्ती अस्पताल, उल्हासनगर-3, ने कल्याण ट्रैफिक पुलिस के तीन कर्मियों पर अपमानजनक व्यवहार और अनुचित दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
डॉ. बनसोडे ने ठाणे पुलिस आयुक्त, जिला शल्यचिकित्सक कार्यालय और अन्य संबंधित विभागों को पत्र लिखकर बताया कि 26 फरवरी 2025 की रात 7:30 बजे, जब वे अपने सरकारी कर्तव्यों का निर्वहन कर घर लौट रहे थे, तब प्रेम ऑटो चौक, कल्याण पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उनकी गाड़ी रोक ली।
डॉ. बनसोंडे का आरोप है कि बिना किसी ठोस कारण के, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उन पर शराब पीकर वाहन चलाने का आरोप लगाया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। जब उन्होंने अपनी पहचान बताई और सरकारी अधिकारी होने की जानकारी दी, तो पुलिसकर्मियों ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा,“क्या तुम्हारे माथे पर लिखा है कि तुम जिला शल्यचिकित्सक (सर्जन) हो?”
डॉ. बनससोडे के अनुसार, तीनों पुलिसकर्मी खुद भी नशे की हालत में प्रतीत हो रहे थे और उन्होंने बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
सरकारी पहचान पत्र दिखाने के बावजूद मेडिकल जांच का दबाव,जब डॉ. बनसोंडे ने अपनी सरकारी पहचान (आईडी कार्ड) दिखाया, तब भी पुलिसकर्मियों ने उन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए ज़बरदस्ती ले जाने की कोशिश की।
उन्होंने पुलिसकर्मियों से स्पष्ट रूप से कहा कि “यदि मेरी जांच की जा रही है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों की भी मेडिकल जांच होनी चाहिए।”
जब डॉ. बनसोंडे ने मेडिकल टेस्ट कराने पर जोर दिया, तो पुलिसकर्मी पीछे हट गए और कुछ दूरी पर जाकर कहा, “हमने तुम्हें माफ किया, जाओ!”
इस पर डॉ. बनसोंडे ने आपत्ति जताई और जवाब दिया, “मुझ पर उपकार करने की जरूरत नहीं है, हम सभी की जांच होनी चाहिए। परिणाम आने दो, सब साफ हो जाएगा।”यह सुनते ही तीनों पुलिसकर्मी मौके से भाग खड़े हुए।
इस घटना के बाद, डॉ. बनसोंडे ने ठाणे पुलिस आयुक्त, ट्रैफिक पुलिस उपायुक्त, कल्याण पुलिस सहायक आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने मांग की है कि “इस तरह की अनुचित और अपमानजनक हरकत में संलिप्त पुलिसकर्मियों पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी सरकारी अधिकारी या आम नागरिक के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न हो।”
अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या संबंधित ट्रैफिक पुलिसकर्मियों पर कोई अनुशासनात्मक कदम उठाए जाते हैं या नहीं।