‘लाव रे तो व्हिडिओ!’ भिवंडी की राजनीति में बड़ा धमाका; पूर्व सांसद कपिल पाटिल ने सबूतों के साथ खोली विपक्षी उम्मीदवार के ‘विक्टिम कार्ड’ की पोल!

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
भिवंडी: चुनावों के दौरान नेताओं द्वारा खुद को जनता की नजरों में पीड़ित दिखाना और ‘विक्टिम कार्ड’ खेलना एक आम बात रही है। भिवंडी लोकसभा क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहाँ महाविकास अघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार ने आरोप लगाया कि उन्हें उम्मीदवारी मिलने के तुरंत बाद सरकारी मशीनरी (MMRDA) के जरिए परेशान किया जा रहा है। लेकिन अब पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और भाजपा नेता कपिल पाटिल ने “लाव रे तो व्हिडिओ” (लगाओ वो वीडियो) वाले अंदाज में कोर्ट के कागजात पेश कर इस पूरे दावे की धज्जियां उड़ा दी हैं।
आइए जानते हैं कि क्या था विपक्षी उम्मीदवार का दावा और क्या है उसकी असली सच्चाई।
विपक्षी उम्मीदवार का दावा: “टिकट मिलते ही शुरू हुआ उत्पीड़न”
महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार ने पत्रकारों के सामने आरोप लगाते हुए कहा था:
- “जैसे ही महाविकास अघाड़ी की ओर से मेरी उम्मीदवारी घोषित हुई, उसके महज दो घंटे के भीतर MMRDA के दो अधिकारी (सोनवणे साहब और कांबळे साहब) पुलिस बल के साथ मेरे प्रोजेक्ट पर पहुंच गए।”
- “उनका मकसद मेरे प्रोजेक्ट पर दंडात्मक कार्रवाई करना था। यह सब सीधे तौर पर कपिल पाटिल के राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है।”
- “इस कार्रवाई के खिलाफ हमें तुरंत हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा, तब जाकर कोर्ट ने हमारे प्रोजेक्ट को राहत (स्थगिती) दी।”
सच्चाई का खुलासा: कपिल पाटिल ने कोर्ट के कागजात दिखाकर जनता को किया जागरूक
इस प्रोपेगैंडा का करारा जवाब देते हुए पूर्व सांसद कपिल पाटिल ने सीधे अदालती दस्तावेजों की तारीखें जनता के सामने रख दीं। पाटिल ने साफ किया कि यह सिर्फ मतदाताओं को गुमराह करने और सहानुभूति बटोरने की एक सोची-समझी साजिश है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार असली टाइमलाइन:
- दावे का झूठ: उम्मीदवार का कहना है कि टिकट मिलने (अप्रैल महीने) के बाद वो कोर्ट गए।
- असली तारीख: उम्मीदवार ने कोर्ट में अपने विवादित प्रोजेक्ट पर स्टे (स्थगिती) लेने के लिए 5 जनवरी 2024 को ही अर्जी दे दी थी।
- कोर्ट का आदेश: माननीय कोर्ट ने 6 जनवरी 2024 को ही इस मामले में अंतरिम राहत (Interim Stay) दे दी थी।
- टिकट घोषणा की तारीख: महाविकास अघाड़ी ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा 4 अप्रैल 2026 को की।
“जनवरी से अप्रैल… पूरे 4 महीने का अंतर है! जो कानूनी कार्रवाई और कोर्ट का स्टे जनवरी में ही हो चुका था, उसे अप्रैल में अपनी उम्मीदवारी से जोड़कर जनता को गुमराह किया जा रहा है। जब कोर्ट का स्टे जनवरी का है, तो अप्रैल में अधिकारी कार्रवाई करने कैसे आ सकते हैं? जनता इस सफेद झूठ को पहचाने।” > — कपिल पाटिल, पूर्व सांसद
निष्कर्ष: जनता की अदालत में सच की जीत
भिवंडी की जागरूक जनता के लिए यह खबर एक बड़ा सबक है। प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन (जैसे भिवंडी तालुका में अवैध कंस्ट्रक्शन या रेगुलाइजेशन की प्रक्रिया) पर होने वाली सामान्य कानूनी कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ का रंग देकर चुनावी फायदा उठाने की कोशिश की गई थी। लेकिन तारीखों के इस खेल और ‘क्रोनोलॉजी’ ने साफ कर दिया है कि “लाव रे तो व्हिडिओ” के बाद अब दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है।








