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उल्हासनगर में अवैध निर्माण पर चिंतन या दबाव की राजनीति? भू-माफियाओं की बैठक पर उठे सवाल?

उल्हासनगर – नीतू विश्वकर्मा

उल्हासनगर में अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। शांतिनगर क्षेत्र में हाल ही में आयोजित एक बैठक को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं, जिसमें कुछ स्वयंघोषित बिल्डरों और भू-माफियाओं की प्रमुख भूमिका रही। इस बैठक का उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषतः नगर आयुक्त पर दबाव बनाना और निर्माण कार्यों में की गई अनियमितताओं को छिपाना बताया जा रहा है।

वास्तविक जनहित या निजी स्वार्थ?
शहर में जब नागरिक जनहित में एकजुट होते हैं, तो उससे सशक्त सामाजिक संगठनों का उदय होता है। परंतु वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कुछ संगठन केवल अपने हितों की पूर्ति और अवैध गतिविधियों को वैध ठहराने के प्रयास के रूप में उभर रहे हैं। ऐसी ही प्रवृत्ति इस बैठक में भी देखने को मिली, जहाँ वैधानिक प्रक्रिया से हटकर प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

भू-माफियाओं की गतिविधियों से प्रभावित रियल एस्टेट
उल्हासनगर में कुछ प्रभावशाली भू-माफियाओं के चलते रियल एस्टेट क्षेत्र में भारी गिरावट देखी जा रही है। अनियंत्रित और अवैध निर्माण कार्यों के कारण प्रॉपर्टी रेट्स में गिरावट आई है और आम नागरिकों की संपत्ति का मूल्य प्रभावित हुआ है। नगर निगम के नियमों की अनदेखी करते हुए कई बिल्डर बार-बार प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आ रहे हैं।

प्रशासनिक भूमिका पर उठते प्रश्न
इस घटनाक्रम के बाद यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रशासन इन अनियमितताओं को समय रहते रोक पाने में विफल हो रहा है, या जानबूझकर अनदेखी कर रहा है? आम नागरिकों और ईमानदार बिल्डरों का कहना है कि जब तक शिकायत दर्ज नहीं होती, तब तक प्रशासन किसी भी अवैध निर्माण पर संज्ञान नहीं लेता।

ईमानदार बिल्डरों और नागरिकों को हो रहा नुकसान
इन अवैध गतिविधियों का सीधा असर उन बिल्डरों पर पड़ रहा है जो नियमों का पालन करते हुए कार्य कर रहे हैं। साथ ही आम जनता, जो वर्षों से “अपने घर” के सपने को साकार करने की दिशा में प्रयासरत है, उसे भी इन गतिविधियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

“लीगल बिल्डर्स एसोसिएशन” की मांग तेज
इस परिस्थिति को देखते हुए अब शहर में एक लीगल बिल्डर्स एसोसिएशन की आवश्यकता महसूस की जा रही है — एक ऐसा संगठन जो केवल वैधानिक दायरे में रहकर कार्य करे और आम लोगों को भरोसेमंद, सुरक्षित और कानून सम्मत आवास उपलब्ध कराने में सहयोग करे।

निष्कर्ष
उल्हासनगर में अवैध निर्माण की आड़ में जनहित की अनदेखी अब और सहनीय नहीं। यह आवश्यक है कि प्रशासन सख्त कदम उठाए और ऐसे तथाकथित बिल्डरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई कर कानून का राज स्थापित करे, ताकि शहर की छवि और आम जनता का विश्वास बहाल रह सके।

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