उल्हासनगर में 30 साल पुराना पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस स्टेशन किशनानी परिवार में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप, ₹19.46 करोड़ का हिसाब गायब!

उल्हासनगर प्रतिनिधि : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर करीब तीन दशकों से चला आ रहा किशनानी परिवार का वित्तीय विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। परिवार के सदस्य रमेश वाशुमल किशनानी (उम्र 54 वर्ष) ने पारिवारिक वाइन व्यवसाय में बड़ी वित्तीय हेराफेरी और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है।
12 नवंबर 2025 को उल्हासनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई इस एफआईआर में प्रदीप वाशुमल किशनानी और नेहा प्रदीप किशनानी को आरोपी बनाया गया है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 318, 316, 336, 338, 340 और 3(5) लगाई गई हैं, जिनमें चोरी, बेईमानी, फर्जी साझेदारी दस्तावेज तैयार करना और पार्टनरशिप फंड का दुरुपयोग शामिल है।
📌 1995 से चला आ रहा पारिवारिक व्यवसाय विवाद का केंद्र
विवाद का मुख्य केंद्र एम/एस पिंकू ट्रेडर्स और उसका रिटेल आउटलेट बेस्ट वाइन सेलर है, जो 1995-96 से परिवार द्वारा संचालित किया जा रहा है। एफआईआर के अनुसार, 1998, 2012, 2014, 2016 और 2019 में कई साझेदारी करार और पुनर्गठन हुए, जिनमें शिकायतकर्ता का हिस्सा बिना जानकारी के बदल दिया गया।
करोड़ों के लेन-देन पर गंभीर सवाल**
शिकायत में 201विवाद का मुख्य केंद्र एम/एस पिंकू ट्रेडर्स और उसका रिटेल आउटलेट बेस्ट वाइन सेलर है, जो 1995-96 से परिवार द्वारा संचालित किया जा रहा है। एफआईआर के अनुसार, 1998, 2012, 2014, 2016 और 2019 में कई साझेदारी करार और पुनर्गठन हुए, जिनमें शिकायतकर्ता का हिस्सा बिना जानकारी के बदल दिया गया।
4 से 2020 के बीच कई बड़े लेन-देन का जिक्र है— ₹50 लाख, ₹1 करोड़, ₹2 करोड़ और ₹2.5 करोड़— जो पंजाब नेशनल बैंक और सिंडिकेट बैंक के खातों के माध्यम से किए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये रकम उसके कैपिटल और लाभांश का हिस्सा थी, जिसे आरोपियों ने छिपाया या गलत तरीके से हस्तांतरित किया।
₹19.46 करोड़ का ‘अनकाउंटेड’ हिस्सा
एक प्रमुख आरोप यह है कि शिकायतकर्ता के हिसाब से उसका ₹19.46 करोड़ का हिस्सा अब तक गायब है। इसके अलावा, 2019 के बाद फर्जी साझेदारी करार, शिकायतकर्ता का नाम हटाना और लाभ विवरण में हेराफेरी जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
पार्टनर की मौत के बाद बढ़ा विवाद
2019 में पार्टनर वाशुमल नारायणदास किशनानी के निधन के बाद साझेदारी संरचना और वित्तीय नियंत्रण में बड़े बदलाव किए गए, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अनधिकृत बताया है।
पुलिस ने जांच शुरू की
पुलिस ने शिकायत स्वीकार कर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस इंस्पेक्टर शंकर वामन अवताडे की निगरानी में जांच शुरू हो चुकी है। 1995 से अब तक के वित्तीय रिकॉर्ड, साझेदारी दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट की गहन जांच की जाएगी।



