उल्हासनगर मनपा चुनाव: साई पक्ष महायुति का साथ छोड़ेगा या अकेले उतरेगा? नाराज युवा उम्मीदवारों का पार्टी कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर आगामी 15 जनवरी 2026 को होने वाले उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। सभी 78 वार्डों के लिए उम्मीदवार चयन और गठबंधन की रणनीति को लेकर पार्टियां सक्रिय हैं। इस बीच, शहर में मजबूत सिंधी वोटबैंक वाली साई पक्ष की भूमिका पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है – क्या वह महायुति (शिवसेना-बीजेपी गठबंधन) के साथ रहेगी या स्वतंत्र रूप से मैदान में कूदेगी?
सूत्रों के हवाले से खबर है कि शुरू में साई पक्ष ने एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के साथ गठबंधन की सहमति दी थी और बातचीत सकारात्मक चल रही थी। लेकिन अब पार्टी ने रणनीति बदलते हुए सभी 78 वार्डों में अपने दम पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी तेज कर दी है। इस संभावना से पार्टी के युवा और नए इच्छुक उम्मीदवारों में जबरदस्त उत्साह के साथ असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।


इसी विवाद के चलते साई पक्ष के कार्यालय में युवा एवं नए उम्मीदवारों का भारी जमावड़ा लगा रहा। दर्जनों कार्यकर्ताओं ने टिकट वितरण, गठबंधन की स्थिति और पार्टी की अंतिम रणनीति पर नेतृत्व से तुरंत स्पष्ट जवाब की मांग की। कार्यालय परिसर में देर रात तक चली बैठकों और चर्चाओं ने पार्टी के अंदरूनी तनाव को उजागर कर दिया।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि साई पक्ष अकेले चुनाव लड़ती है, तो इसका सीधा असर महायुति के समीकरणों पर पड़ेगा। उल्हासनगर की सिंधी बहुल जनसंख्या में साई पक्ष की गहरी पैठ को देखते हुए यह कदम वोटों के विभाजन को बढ़ावा दे सकता है और शहर की सियासत में नया तूफान ला सकता है।
फिलहाल साई पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कार्यालय की बढ़ती हलचल और उम्मीदवारों की बेचैनी यह इशारा कर रही है कि जल्द ही कोई बड़ा फैसला सामने आएगा। शहरवासी उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं कि यह राजनीतिक उलटफेर चुनावी नतीजों को कैसे प्रभावित करेगा।
नागरिकों से अपील: मतदान अवश्य करें और शहर के विकास के लिए सूचित निर्णय लें!






