उल्हासनगर: दिग्गज नेता को हराकर अरुण आशान ने रचा इतिहास; अब महापौर पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार



शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर: महाराष्ट्र की राजनीति में उल्हासनगर महानगरपालिका का चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प रहा। शिवसेना के कद्दावर नेता अरुण आशान ने पैनल संख्या 15 से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने 35 वर्षों से राजनीति के दिग्गज माने जाने वाले धनंजय बोराडे को करारी शिकस्त दी है।
अजेय किले को किया फतह
धनंजय बोराडे को उल्हासनगर की राजनीति का वह स्तंभ माना जाता था, जिन्हें कल्याण के विधायक गणपत गायकवाड़ भी डिगा नहीं पाए थे। ऐसे में अरुण आशान की यह जीत एक मिसाल बन गई है। इस जीत के पीछे कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और रणनीतिक कौशल को मुख्य कारण माना जा रहा है।
टीम वर्क और ‘शिंदे’ से किया वादा पूरा
अरुण आशान के नेतृत्व में पैनल 13, 14 और 15 में कुल 12 नगरसेवकों ने जीत हासिल की है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे को दिया गया अपना वादा भी पूरा कर दिखाया है। इस जीत में शिवसेना कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- रवि बाबूलाल वसीटा
- सूरज बापू कारकर
- नीलेश विट्ठल बोबड़े
- कमल जगदीश पंजाबी
इन सभी कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर पैनल 15 सहित अन्य क्षेत्रों में शिवसेना का परचम लहराया।
महापौर पद की दौड़ में सबसे आगे
अब जब शहर में महापौर (Mayor) के चयन की चर्चाएं तेज हैं, तो अरुण आशान का नाम सबसे ऊपर उभर कर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों और आम जनता का मानना है कि:
1.अनुभव: वर्तमान में उल्हासनगर के सबसे अनुभवी नेताओं में आशान का कद सबसे ऊंचा है।
2.जनता की पसंद: स्थानीय नागरिकों और शिवसैनिकों के बीच उनकी स्वीकार्यता सबसे अधिक है।
3.विकास की जिम्मेदारी: शहर में रुके हुए विकास कार्यों को गति देने के लिए जनता उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार चेहरे के रूप में देख रही है।
अरुण आशान की यह जीत न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उल्हासनगर में शिवसेना (शिंदे गुट) की बढ़ती पकड़ का भी प्रमाण है। अब देखना यह है कि क्या पार्टी उन्हें शहर के प्रथम नागरिक की जिम्मेदारी सौंपती है।





