सिद्धी प्राइड इमारत प्रकरण: जमाबंदी आयुक्त द्वारा सनद रद्द होने के बावजूद अल्टरनेट सनद देने पर उठे गंभीर सवाल?

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर में स्थित सिद्धी प्राइड इमारत को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार, संबंधित प्रकरण में जमाबंदी आयुक्त द्वारा पूर्व में अभिजीत खडकबाण की सनद रद्द कर दी गई थी। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि संबंधित भवन को तोड़कर भूमि का ताबा महाराष्ट्र शासन के नाम पर लिया जाए तथा वहां शासन का बोर्ड लगाया जाए।
हालांकि, आश्चर्यजनक रूप से अब यह आरोप सामने आ रहे हैं कि वर्तमान प्रांत अधिकारी श्री विजयानंद शर्मा द्वारा बिना किसी प्रत्यक्ष विध्वंसात्मक कार्रवाई के, उसी भवन को अल्टरनेट (वैकल्पिक) सनद जारी कर दी गई। इतना ही नहीं, भवन में कथित रूप से अतिरिक्त एवं अनधिकृत निर्माण होने के बावजूद उसे वैध बनाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात भी सामने आई है।
प्रमुख प्रश्न
- जब उच्च अधिकारी द्वारा सनद रद्द कर स्पष्ट आदेश पारित किया गया था, तो उस पर अमल क्यों नहीं हुआ?
- क्या अतिरिक्त निर्माण की जांच की गई?
किन आधारों पर वैकल्पिक सनद जारी की गई?
क्या यह निर्णय नियमानुसार लिया गया या इसमें प्रशासनिक चूक हुई?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
यह मामला अब जनहित से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, और नागरिकों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग इस विषय में सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण जारी करे तथा यदि कोई अनियमितता हुई है तो उस पर उचित कार्रवाई की जाए।







