ArticleAwarenessBreaking NewsBusinesschampionshipCity NewsCMDevendra FadnavisecologyEducationaleknath shindeElectionfeaturedfraudulentGadgetsheadlineHeadline TodayLife StyleLifestylelocalityMaharashtramaharashtra chief ministerMedical activitiesPappu Kalanipolicy & Goverancepoliticalpoliticspollution & environmentprotest for justicepublic awarenessPublic hearingRTI ActivistscamShaurya TimesShiv Sena ShindeSocialsportsstrike against lawThaneTOKtrafficTransportation ServicestrendingUlhasnagarUlhasnagar Breaking NewsUlhasnagar EducationalUMC Breaking newsUnder DCP Zone-4Viral VideoWaldhuni Riverwater supply issues

उल्हासनगर में पानी दरों में 20% तक बढ़ोतरी: सेवा वही, वसूली ज़्यादा? नागरिकों में रोष – “क्या पानी सेवा में कोई बदलाव होगा या जनता ही होगी परेशान?”

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा

उल्हासनगर: शहर में पानी की गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और कम दबाव जैसी समस्याएं पहले से ही चर्चा में थीं। ऐसे में अब पानी के दरों में करीब 20% तक बढ़ोतरी ने नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब मूलभूत समस्याएं जस की तस हैं, तो फिर दर वृद्धि किस आधार पर की गई?

नागरिकों के मुख्य सवाल:

  • क्या सभी क्षेत्रों में पानी समय पर मिल रहा है?
  • क्या हर इलाके में पानी का प्रेशर समान और पर्याप्त है?
  • क्या टूटी-फूटी पाइपलाइन और लीकेज पूरी तरह ठीक कर दी गई हैं?
  • जब सेवा में सुधार नहीं हुआ, तो दरों में बढ़ोतरी क्यों?
  • अलग से पानी का बिल क्यों निकाला गया, जबकि अन्य कर पहले से वसूले जा रहे हैं?
  • बिलों में 25% से 35% तक की बढ़ोतरी का आधार क्या है?

नई दरें लागू – पहली ही महासभा में निर्णय

उल्हासनगर महानगरपालिका की नव-निर्वाचित महासभा में पानी के नए दरों को मंजूरी दी गई। पुराने और नए दर इस प्रकार हैं:

  पुराने दर (₹) नए दर (₹) बढ़ोतरी (₹)
3,600 4,400 800
1,800 2,300 500
1,200 1,500 300

नागरिकों का कहना है कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को भारी मतों से चुनकर भेजा, लेकिन पहली ही बैठक में दर वृद्धि का फैसला जनता के लिए “कड़वी सौगात” साबित हुआ।

जनता में नाराजगी, पारदर्शिता की मांग

शहर के कई हिस्सों में अभी भी टूटी पाइपलाइन, भारी लीकेज, गंदा पानी और अनियमित सप्लाई जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में लोगों का आरोप है कि यदि सेवा स्तर में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है, तो केवल वसूली बढ़ाना न्यायसंगत नहीं है।

नागरिक संगठनों ने मांग की है कि:

  • दर वृद्धि से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की स्पष्ट योजना सार्वजनिक की जाए।
  • पानी आपूर्ति की गुणवत्ता और नियमितता सुनिश्चित की जाए।
  • लीकेज रोकने और बर्बादी कम करने के लिए तत्काल अभियान चलाया जाए।
  • दर वृद्धि पर सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाए।

बड़ा सवाल?

क्या पानी सेवा में वास्तविक बदलाव देखने को मिलेगा या फिर आम जनता ही आर्थिक बोझ उठाती रहेगी?
क्या महानगरपालिका केवल राजस्व वृद्धि पर ध्यान दे रही है, या शहर की मूलभूत सुविधाओं में ठोस सुधार की भी कोई कार्ययोजना है?


अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं — क्या वे नागरिकों के सवालों का संतोषजनक जवाब देंगे या विरोध और तेज होगा?

Shaurya Times

🛡️ Shaurya Time’s – Your Voice, Our Questions! A fearless digital news platform focused on public safety, justice, and accountability. We expose: ✅ Ground realities ✅ RTI & official documents ✅ Civic failures & scams ✅ Crime, corruption & cover-ups Bold journalism. Real issues. No compromise. Because awareness is the first step to change. 📢 Shaurya Time’s – Reporting the truth, without fear!

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

कंटेंट चुराना पाप है। चुराने की बजाय खुद कंटेंट लिखें।
- नीतू विश्वकर्मा

Verified by MonsterInsights