सावधान! उल्हासनगर में ‘महान लक्ज़ुरिया’ प्रोजेक्ट पर नाला अतिक्रमण का आरोप: क्या प्रशासन लेगा कड़ा एक्शन?




शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर: शहर में अवैध निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के साथ छेड़छाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। शशिकांत दायमा द्वारा प्रशासन को दी गई शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर (421001) स्थित ‘महान लक्ज़ुरिया’ नामक 14 मंजिला आवासीय परियोजना में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए प्राकृतिक नाले पर अतिक्रमण करने का आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
अनिल गुलाब जामुन रोड, सोनारा हॉल के पास स्थित इस परियोजना (यू नंबर 398, शीट नंबर 72, सी.टी.एस. नंबर 6684) में कुल 53 अपार्टमेंट्स हैं। शिकायत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- प्राकृतिक नाले को ढका गया: बिल्डर द्वारा लगभग 300 फुट लंबे और 12 फुट चौड़े प्राकृतिक नाले को RCC कंक्रीट से पूरी तरह कवर कर दिया गया है।
- सुरक्षा का भारी जोखिम: नाले पर करीब 45 टन सीमेंट का बोझ डाला गया है। यदि भविष्य में कोई दुर्घटना होती है या कोई जीव इसमें फंसता है, तो उसे निकालना नामुमकिन होगा।
- बाढ़ का खतरा: नाले के प्रवाह को बाधित करने से मानसून के दौरान आसपास के घरों में पानी भरने और जनजीवन अस्त-व्यस्त होने की प्रबल संभावना है।
- नियमों का उल्लंघन: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अनुसार, नाले से 6 मीटर की न्यूनतम मार्जिन छोड़ना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ बिल्डिंग को नाले के मात्र 2 मीटर ऊपर कवर करके बनाया गया है।
- फायर सेफ्टी और बॉटल नेक: 6 मीटर की ‘ओपन टू स्काई’ फायर मार्जिन का अभाव है। साथ ही, डीपी रोड के 12 मीटर के बजाय मौके पर केवल 6 मीटर जगह छोड़ी गई है, जिससे ‘बॉटल नेक’ की स्थिति पैदा हो गई है।
प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका
शिकायतकर्ता ने संदेह जताया है कि इस प्रॉपर्टी को ‘ग्रीन जोन’ से ‘आर जोन’ में बदलते समय नाले के अस्तित्व को जानबूझकर छिपाया गया है। यदि UDCPR, फायर विभाग, NGT और MPCB के मानकों के अनुसार जांच की जाती है, तो बिल्डिंग के लगभग 20 फीट के हिस्से पर गाज गिर सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी
इस समाचार के माध्यम से उन ग्राहकों को सतर्क किया गया है जो इस प्रोजेक्ट में निवेश करने की सोच रहे हैं। अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन के कारण भविष्य में खरीदारों को भारी आर्थिक नुकसान और कानूनी संकट का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन से मांग: स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ता ने उल्हासनगर महानगरपालिका के महापौर और आयुक्त से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और दोषी बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।



