उल्हासनगर में होली पर ‘परमिशन’ का भंग! दो बड़े आयोजनों के नाम पर कथित धोखाधड़ी, एजेंट अमर भाटिया पर गंभीर आरोप

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर: होली के पावन अवसर पर शहर में आयोजित दो भव्य कार्यक्रम—उल्हासनगर-3 स्थित मयूर लॉन्स (जश्न-ए-रंग) और रीजेंसी गार्डन (रंग उत्सव 6.0)—में जहां एक ओर रंग और उत्साह का माहौल देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर इन आयोजनों को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक विवाद सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों कार्यक्रमों के लिए आवश्यक एक्साइज डिपार्टमेंट (आबकारी विभाग) की अनुमति को लेकर आयोजकों के साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी की गई है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक, अमर भाटिया नामक एक एजेंट, जो विभागीय कार्य करवाने का दावा करता है, ने दोनों आयोजनों के आयोजकों से परमिट दिलाने के नाम पर कथित रूप से मोटी रकम वसूली।
आरोप है कि संबंधित एजेंट ने आयोजकों को यह विश्वास दिलाया कि उनकी एक्साइज परमिशन पूरी तरह मंजूर हो चुकी है, जबकि वास्तविकता में केवल आवेदन (Application) जमा किया गया था और अंतिम स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई थी।
ऐन कार्यक्रम के दौरान जब परमिट की स्थिति स्पष्ट हुई, तो आयोजकों और संबंधित पक्षों में हड़कंप मच गया।
मुख्य बिंदु (Highlights):
- दो प्रतिष्ठित इवेंट्स निशाने पर: ‘जश्न-ए-रंग’ और ‘रंग उत्सव 6.0’ जैसे बड़े आयोजनों को कथित रूप से गुमराह किया गया।
- एजेंट की भूमिका संदिग्ध: अमर भाटिया पर आरोप है कि उन्होंने एक्साइज ड्यूटी और कानूनी अनुमति के नाम पर रकम ली, लेकिन विभाग से अंतिम स्वीकृति नहीं दिलवाई।
- कानूनी जोखिम: बिना वैध अनुमति के आयोजन होने पर आयोजकों पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
- निवेश और कानून व्यवस्था पर प्रश्न: इस घटनाक्रम से आयोजकों के आर्थिक निवेश और शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
“आयोजकों को भरोसा दिलाया गया था कि सभी दस्तावेज पूर्ण हैं। लेकिन अंतिम समय पर परमिट न होने की जानकारी सामने आने से पूरे आयोजन पर संकट के बादल छा गए। यह न केवल आर्थिक नुकसान का मामला है, बल्कि कानून व्यवस्था के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।”
जनजागरूकता और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद शहर के इवेंट प्लानर्स, व्यवसायियों और नागरिकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि क्या पीड़ित आयोजक संबंधित एजेंट के खिलाफ पुलिस प्रशासन या आबकारी विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हैं।
इस प्रकरण ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बड़े आयोजन से पहले सभी सरकारी अनुमतियों की स्वयं पुष्टि करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति से बचा जा सके।









