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उल्हासनगर पुलिस पर गंभीर आरोप: पेट्रोल से गाड़ी जलाने वाले सराईत गुन्हेगार को ‘अभयदान’ – गंभीर धाराएं दबाईं, धार्मिक भावनाओं का अपमान भी नजरअंदाज!पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल?

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा

उल्हासनगर (महाराष्ट्र), एक चौंकाने वाली घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 10 मार्च 2026 को दर्ज FIR नंबर 0102/2026 में एक सराईत अपराधी पवन उर्फ अजित प्यारेलाल गुप्ता पर पेट्रोल डालकर गाड़ी जलाने का आरोप है, लेकिन पुलिस ने केवल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हल्की धारा 324(5) लगाई है। जबकि घटना की गंभीरता को देखते हुए BNS धारा 324 (अग्नि या विस्फोटक पदार्थ से खोडसाळपणा) और BNS धारा 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना) दोनों लगनी चाहिए थीं।

🔥 घटना क्या थी?

शिकायतकर्ता शफिया शकिल सैयद (46 वर्षीय गृहिणी) ने पुलिस को बताया कि 9 मार्च 2026 की रात 11 बजे से 10 मार्च सुबह 4:30 बजे के बीच आरोपी पवन गुप्ता ने मुस्लिम महिला के बुरखे का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाई और पेट्रोल डालकर उनकी गाड़ी में आग लगा दी। आरोपी ने न केवल वाहन को नुकसान पहुंचाया, बल्कि मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम भी किया। घटना उल्हासनगर के तानाजी नगर, एम.आई.डी.सी. रोड क्षेत्र में हुई।

⚖️ कानूनी विश्लेषण – पुलिस ने क्यों कमजोर धाराएं लगाईं?

  • BNS धारा 324: पेट्रोल जैसे ज्वालाग्राही पदार्थ से वाहन जलाने पर लागू होती है। यह पुरानी IPC धारा 435 का स्थान ले चुकी है। सजा: 7 वर्ष तक कैद + जुर्माना।
  • BNS धारा 299 (पुरानी IPC 295A): किसी भी धर्म की भावनाएं जानबूझकर आहत करने पर लागू। सजा: 3 वर्ष तक कैद + जुर्माना या दोनों।
  • FIR में केवल 324(5) – जो सामान्य खोडसाळपणा की हल्की उप-धारा है। गंभीर अग्नि-घटना और बुरखे का इस्तेमाल (धार्मिक प्रतीक का दुरुपयोग) दोनों को नजरअंदाज किया गया।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल?

  • आरोपी पवन गुप्ता पहले से सराईत गुन्हेगार के रूप में जाना जाता है, फिर भी उसे तुरंत गिरफ्तार कर गंभीर धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं?
  • क्या उल्हासनगर पुलिस स्टेशन के अधिकारी संतोष गौबा अव्हाड (इंस्पेक्टर) आरोपी पर “कृपादृष्टि” रखते हैं?
  • घटना की गंभीरता के बावजूद FIR में ज्वालाग्राही पदार्थ और बुरखे का जिक्र तक नहीं – क्या यह जानबूझकर किया गया?

📢 शहर में चर्चा तेज

स्थानीय लोग कह रहे हैं – “सराईत गुन्हेगार को पुलिस का संरक्षण मिल रहा है। पवन गुप्ता किसी को नहीं मानता क्योंकि उसे पुलिस का अभय है।” गाड़ी जलने की खबर फैलते ही पुलिस ने गिरफ्तारी तो कर ली, लेकिन धाराएं इतनी कमजोर कि आरोपी आसानी से जमानत पर बाहर आ सकता है।

जनता के सवाल:

1.क्या पुलिस आरोपी को बचाने के लिए कमजोर धाराएं लगा रही है?

2.धार्मिक भावनाओं का अपमान करने वाले को क्यों बख्शा जा रहा है?

3.क्या यह उल्हासनगर पुलिस की नियमित कार्यशैली है?

जन जागरूकता अपील:


यह मामला सिर्फ एक FIR नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता का सवाल है। अगर आपके क्षेत्र में भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो तुरंत उच्च अधिकारियों या मीडिया से संपर्क करें। कानून सबके लिए समान होना चाहिए – न कि चुनिंदा अपराधियों के लिए “अभयदान”।

Shaurya Times

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