उल्हासनगर में 1 करोड़ की कथित फर्जी खंडणी मामला: पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने पुलिस विभाग को लगाई कड़ी फटकार

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर: 1 करोड़ रुपये की कथित फर्जी खंडणी (वसूली) प्रकरण में पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़े ताशेरे ओढ़े हैं। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों से पुलिस की भूमिका पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
प्राधिकरण के समक्ष उपस्थित होकर हिललाइन पुलिस स्टेशन के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक जगताप ने अधिवक्ता स्वप्निल पाटील के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी थी। हालांकि, संबंधित दस्तावेजों और प्रमाणों की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि दी गई जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत थी।
बाद में पुलिस विभाग ने अपने संशोधित जवाब में स्वीकार किया कि अधिवक्ता स्वप्निल पाटील के विरुद्ध उक्त मामले दर्ज नहीं हैं तथा “नजरचूक” के कारण गलत जानकारी प्रस्तुत की गई। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों का उल्लेख किया गया था, वे उनके सहकर्मी शैलेश तिवारी के नाम पर दर्ज हैं और उनका स्वप्निल पाटील से कोई संबंध नहीं है।
इस गंभीर त्रुटि पर प्राधिकरण ने पुलिस विभाग की भूमिका पर तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रस्तुत दस्तावेजों को खारिज कर दिया।
प्राधिकरण के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने पुलिस अधिकारियों से कई गंभीर प्रश्न पूछे, जिनमें शामिल हैं:
- आप एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी होते हुए ऐसी गंभीर गलती कैसे कर सकते हैं?
- किसी वकील को हिरासत में लेने से पहले नोटिस क्यों नहीं दिया गया?
- यदि सुबह हिरासत में लिया गया था तो औपचारिक गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई?
- कथित रूप से झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति पर क्या कार्रवाई की गई?
इन सवालों के जवाब में उपस्थित हिललाइन पुलिस स्टेशन के पीएसआई धूमल संतोषजनक उत्तर देने में असमर्थ रहे।
अगली सुनवाई में वरिष्ठ अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण ने अगली सुनवाई में डीसीपी, तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक तथा सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और पुलिस जवाबदेही का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
“सत्यमेव जयते! लड़ेंगे और जीतेंगे!”
— अधिवक्ता स्वप्निल पाटील





