1 साल पूरा, फिर भी उल्हास नदी प्रदूषणमुक्त नहीं: DPR की घोषणा के 7 महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं!





शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर/कल्याण/बदलापुर : उल्हास नदी को प्रदूषणमुक्त करने की मांग को लेकर 22 मार्च 2025 को शुरू हुए आंदोलन को एक वर्ष पूरा हो गया है, लेकिन आज तक कोई ठोस उपाययोजना जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि शासन और प्रशासन ने बार-बार लिखित एवं मौखिक आश्वासन देकर केवल समय बिताया है।
पिछले 9 वर्षों से उल्हास नदी को स्वच्छ बनाने तथा ठाणे, कल्याण, डोंबिवली, उल्हासनगर सहित लगभग 80 लाख नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर आंदोलन किए गए। लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
इसी नाराजगी के चलते 22 मार्च 2025 को शासन-प्रशासन के विरोध में आंदोलनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से मुंडन कर आंदोलन की शुरुआत की थी। आज उस ऐतिहासिक आंदोलन को एक वर्ष पूरा हो चुका है, परंतु अधिकांश मांगें अब भी लंबित हैं।
📌 DPR की घोषणा, लेकिन फाइलों में ही अटकी प्रक्रिया
28 जुलाई 2025 को प्रशासन की ओर से नदी शुद्धिकरण के लिए डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने की घोषणा की गई थी। लेकिन 7 महीने बीत जाने के बावजूद डीपीआर तैयार नहीं हुई, जिससे नागरिकों में रोष व्याप्त है।
🚨 प्रमुख आरोप और लंबित मांगें
- उल्हास नदी में गिरने वाले प्रदूषित सांडपानी के नाले अब भी चालू हैं।
- नदी जलपर्णी (वॉटर हायसिंथ) मुक्त नहीं हुई, बल्कि जनवरी से फिर जलपर्णी फैलनी शुरू हो गई।
- मोहने बंधारे से कुछ मीटर पहले नया बंधारा बनाने तथा मौजूदा बंधारे के पास जमा गंदा गाळ और रासायनिक कचरा हटाने की मांग अधूरी है।
- म्हारळ नाला, गाळेगाव नाला और मोहिली नाला अब भी सीधे नदी में गिर रहे हैं।
- शिरगांव-बदलापुर MIDC क्षेत्र से निकलने वाले रसायनयुक्त सांडपानी के नदी में मिलने का आरोप जारी है।
- बदलापुर के 8 बड़े नाले आज भी बिना शुद्धिकरण के नदी में मिल रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों पर सवाल
आंदोलनकारियों का कहना है कि लोकसभा, विधानसभा और नगरपालिका चुनावों में भारी मतों से चुने गए जनप्रतिनिधियों को अब अपने वादों की याद दिलानी पड़ रही है। जनता को स्वच्छ पानी और स्वच्छ नदी का वादा अब तक अधूरा है।
अब आगे क्या?
22 मार्च 2025 को शुरू हुए इस आंदोलन को 1 वर्ष पूरा होने के बावजूद यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी जा रही है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक कार्रवाई चाहिए।





