मनसे के प्रयासों से मिली बड़ी राहत: कमला नेहरू नगर क्षेत्र का 7–8 महीनों से लंबित पानी संकट आखिरकार सुलझा! 🚰

शौर्य टाईम्स रिपोर्टिंग : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर के कमला नेहरू नगर स्थित शिवकृपा किराना स्टोर्स के सामने रहने वाले नागरिकों को पिछले सात से आठ महीनों से चल रहे गंभीर जल संकट से आखिरकार मुक्ति मिल गई है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के स्थानीय पदाधिकारी श्री मैनुद्दीन यूनुस शेख के सतत प्रयास और follow-up के कारण महानगरपालिका प्रशासन को इस समस्या पर ध्यान देना पड़ा।
इस पहल के सफल होने पर, स्थानीय नागरिकों ने मनसे नेतृत्व, नगर प्रशासन तथा जलापूर्ति विभाग (पाणीपुरवठा विभाग) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
🔴 सात माह से बंद थी पानी की धार: समस्या का मूल
कमला नेहरू नगर क्षेत्र में पिछले कई महीनों से नलों में पानी नहीं आ रहा था, जिससे यहाँ के निवासियों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। यह स्थिति तब थी जब उल्हासनगर शहर में करोड़ों रुपये खर्च कर नई जलवाहिनियाँ (वॉटर पाइपलाइन) बिछाने का काम चल रहा है। पीने के पानी के गंभीर अभाव के कारण नागरिकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी।
🔴 मनसे ने दी थी तीव्र आंदोलन की चेतावनी
मनसे महानगर संघटक श्री मैनुद्दीन शेख और विभागाध्यक्ष कैलास घोरपडे ने इस गंभीर मुद्दे को तुरंत उठाते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त, मुख्य स्वच्छता निरीक्षक, जलापूर्ति विभाग और प्रभाग अधिकारी को लिखित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में तात्काल कार्रवाई की मांग करते हुए मनसे ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी थी:
“यदि एक सप्ताह के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो मनसे के नेतृत्व में क्षेत्र में तीव्र जनआंदोलन किया जाएगा।”
🔴 प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और नई जलवाहिनी का प्रस्ताव
मनसे की इस चेतावनी के बाद, जलापूर्ति विभाग ने समस्या की गंभीरता को समझते हुए संबंधित विभाग को तत्काल क्षेत्र का निरीक्षण करने का आदेश दिया। निरीक्षण के बाद, क्षेत्र में एक नई D.I. (Ductile Iron) जलवाहिनी बिछाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। प्रशासन ने नागरिकों को जल्द ही नियमित जलापूर्ति शुरू करने का आश्वासन दिया है।
अन्य गंभीर मुद्दा: असामाजिक तत्वों के अड्डे बने जीर्ण शौचालय
जल संकट के समाधान के साथ ही, मनसे ने एक और गंभीर क्षेत्रीय मुद्दा उठाया है। पॅनल क्रमांक 1, बेरेक 119 और 122 में स्थित दो शौचालय पिछले पाँच वर्षों से बंद, जीर्ण और खतरनाक (धोकादायक) स्थिति में हैं।
मनसे के अनुसार, ये जीर्ण संरचनाएँ असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुकी हैं, जहाँ शराब (दारू) का सेवन, नशीले पदार्थों (गांजा/नशा) का सेवन, और अन्य अवांछित/गंदी गतिविधियाँ बड़े पैमाने पर होती हैं। मौके पर खाली शराब और बीयर की बोतलें भी भारी मात्रा में पाई जाती हैं।
मनसे की मांग है कि इन खतरनाक संरचनाओं को तत्काल ध्वस्त किया जाए और उनकी जगह पर समाज मंदिर, हजेरी शेड या एक छोटा उद्यान विकसित किया जाए, ताकि सकारात्मक सामुदायिक गतिविधियाँ शुरू हो सकें।
📌 निष्कर्ष
मनसे के लगातार और प्रभावशाली follow-up के कारण—
कमला नेहरू नगर का दीर्घकालीन जल संकट हल हुआ।
खतरनाक शौचालयों को हटाकर सामुदायिक स्थल विकसित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा।
यह घटना उल्हासनगर प्रशासन को क्षेत्रीय समस्याओं को गंभीरता से लेने के लिए बाध्य करने में सफल रही, जो सामान्य नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।
क्या आप मनसे द्वारा उठाए गए जीर्ण शौचालय और असामाजिक तत्वों के अड्डे वाले मुद्दे पर कोई अतिरिक्त जानकारी या प्रशासन की वर्तमान स्थिति जानना चाहेंगे?







