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उल्हासनगर में टीडीआर घोटाले का खुलासा: राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई।

उल्हासनगर: नीतू विश्वकर्मा

उल्हासनगर में हुए बहुचर्चित टीडीआर (ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स) घोटाले के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सुरेश थदानी का टीडीआर डीआरसी आरसीसी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस घोटाले में नगर रचनाकार प्रकाश मुळे, असिस्टेंट टाउन प्लानर ललित खोबागड़े और शहर अभियंता तरुण सेवकानी की मिलीभगत से सुरेश थदानी को करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाने का गंभीर आरोप है।

सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों ने टीडीआर का दुरुपयोग कर अवैध रूप से कई इमारतों के निर्माण योजनाओं को मंजूरी दी थी। अब जब टीडीआर रद्द कर दिया गया है, तो यह अनिवार्य हो गया है कि जिन इमारतों के निर्माण के लिए इस बोगस टीडीआर के आधार पर योजना स्वीकृत की गई थी, उन पर तत्काल रोक लगाई जाए।

शिवसेना ( उद्धव बालासाहेब ठाकरे) उल्हासनगर शहर के उपशहर प्रमुख दिलीप मिश्रा ने मांग की है कि मा.आयुक्त मैडम से अपेक्षा है कि वे इन निर्माणाधीन इमारतों के प्लान को तत्काल प्रभाव से स्थगित करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी अड़चन न खड़ी हो। उनका स्पष्ट मत है कि जब टीडीआर रद्द हो चुका है, तो टीडीआर के माध्यम से स्वीकृत हुए आरसीसी समायोजन वाली इमारतों के प्लान को भी रद्द किया जाना चाहिए।

उल्हासनगर महापालिका के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है, जिसमें खोबागड़े और शहर अभियंता तरुण सेवकानी द्वारा महापालिका को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इस प्रकरण ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि इस घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि नगर विकास की प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो सके।

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