उल्हासनगर प्रॉपर्टी मार्केट पर संकट: रेडी रेकनर दरों में 9% की बढ़ोतरी, मुंबई में सिर्फ 3.39%, सरकार का फैसला चौंकाने वाला।

उल्हासनगर : नीतू विश्वकर्मा
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में तैयार रेकनर (आरआर) दरों में औसतन 3.89% की बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो प्रॉपर्टी बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। जहां मुंबई जैसे महानगर में यह बढ़ोतरी केवल 3.39% है, वहीं उल्हासनगर में आरआर दरों में भारी 9% की वृद्धि ने सभी को हैरान कर दिया है। सवाल यह उठता है कि जिस उल्हासनगर का प्रॉपर्टी मार्केट पहले ही लगभग खत्म होने की कगार पर है, वहां इतनी बड़ी बढ़ोतरी का क्या औचित्य है? क्या यह कदम उल्हासनगर के रियल एस्टेट बाजार को और गहरे संकट में धकेलने की साजिश है?
उल्हासनगर का प्रॉपर्टी मार्केट: पहले से ही बदहाल स्थिति
उल्हासनगर, जो कभी अपने किफायती आवास और छोटे-मोटे व्यापारिक केंद्र के लिए जाना जाता था, पिछले कुछ वर्षों से प्रॉपर्टी मार्केट में भारी गिरावट का सामना कर रहा है। खराब बुनियादी ढांचा, अवैध निर्माणों की भरमार और बेहतर कनेक्टिविटी की कमी ने इस क्षेत्र को निवेशकों और खरीदारों की नजर से दूर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की मांग बनी हुई है, वहीं उल्हासनगर में बाजार लगभग ठप हो चुका है। ऐसे में 9% की बढ़ोतरी को लेकर स्थानीय निवासियों और रियल एस्टेट डेवलपर्स में गुस्सा और चिंता व्याप्त है।
सरकार का फैसला: आंकड़ों में अंतर
महाराष्ट्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तैयार रेकनर दरों में संशोधन किया है, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू हो गया। राज्य का औसत बढ़ोतरी 3.89% है, जिसमें मुंबई में 3.39%, ठाणे में 7.72%, सोलापुर में 10.17%, और पुणे में 4.16% की वृद्धि शामिल है। लेकिन उल्हासनगर में 9% की बढ़ोतरी ने सबको चौंका दिया। सोलापुर के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी है, जबकि उल्हासनगर की स्थिति सोलापुर से बिल्कुल उलट है। सोलापुर में औद्योगिक और शहरी विकास की संभावनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन उल्हासनगर में ऐसी कोई उम्मीद नजर नहीं आती।
विशेषज्ञों की राय: उल्हासनगर पर अनुचित बोझ
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी उल्हासनगर के प्रॉपर्टी मार्केट को और कमजोर कर सकती है। एक मुंबई स्थित डेवलपर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जब आरआर दरें बढ़ती हैं, तो डेवलपर्स पर टैक्स का बोझ बढ़ता है, जो अंततः खरीदारों पर डाला जाता है। लेकिन उल्हासनगर में पहले ही खरीदार नहीं हैं, तो यह बोझ कौन उठाएगा? यह बाजार को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक कदम है।” स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सिधवानी ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना की और कहा, “यहां सड़कें टूटी हुई हैं, पानी की सप्लाई अनियमित है, और अवैध निर्माणों का मुद्दा अभी तक सुलझा नहीं है। फिर भी सरकार ने इतनी बड़ी बढ़ोतरी क्यों की?”
क्या है सरकार का तर्क?
राज्य के राजस्व विभाग के अनुसार, आरआर दरों में बढ़ोतरी का फैसला लेनदेन के रुझानों और क्षेत्रीय विकास के आधार पर लिया गया है। राज्य के पंजीयन महानिरीक्षक रवींद्र बिनवड़े ने कहा, “मुंबई को छोड़कर राज्य में औसत बढ़ोतरी 4.39% है। कुछ क्षेत्रों में दरें कम भी की गई हैं, लेकिन नगर निगम क्षेत्रों में औसतन 5.95% की वृद्धि जरूरी थी।” हालांकि, उल्हासनगर में 9% बढ़ोतरी के पीछे कोई ठोस तर्क नहीं दिया गया है, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।
संभावित प्रभाव: बाजार का अंत?
रियल एस्टेट उद्योग के प्रतिनिधियों का मानना है कि यह बढ़ोतरी न केवल घर खरीदारों के लिए मुश्किलें बढ़ाएगी, बल्कि डेवलपर्स को भी परियोजनाएं शुरू करने से रोकेगी। निर्माण लागत में पहले से ही वृद्धि और हाल ही में शुरू की गई 1% मेट्रो सेस ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। उल्हासनगर में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले ही मुंबई और ठाणे की तुलना में कम हैं, लेकिन मांग की कमी के कारण यह बढ़ोतरी बाजार को पूरी तरह ठप कर सकती है।
सवाल बरकरार: उल्हासनगर को क्यों निशाना बनाया गया?
यह सवाल हर किसी के मन में है कि आखिर उल्हासनगर में इतनी बड़ी बढ़ोतरी क्यों की गई, जबकि इसका प्रॉपर्टी मार्केट पहले ही संकट में है। क्या यह सरकार की ओर से राजस्व बढ़ाने की कोशिश है, या फिर इसके पीछे कोई और मंशा छिपी है? कुछ लोग इसे राजनीतिक निर्णय के रूप में भी देख रहे हैं, क्योंकि उल्हासनगर का क्षेत्रीय विकास अन्य शहरों की तुलना में पीछे है।
आगे क्या?
उल्हासनगर के निवासियों और डेवलपर्स ने इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने की योजना बनाई है। अगर सरकार इस बढ़ोतरी को वापस नहीं लेती, तो यह क्षेत्र रियल एस्टेट के नक्शे से पूरी तरह गायब हो सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि उल्हासनगर के प्रॉपर्टी मार्केट पर यह फैसला एक बड़ा झटका है, जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।