
शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
राजनीतिक गलियारों में इस समय एक नया और बड़ा भूचाल आ गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या कुछ नेताओं ने सिर्फ सत्ता के लालच में शिवसेना का दामन थामा था और पार्टी में पद मिलते ही अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है? ताजा मामला शिवसेना की महापौर श्रीमती अश्विनी निकम से जुड़ा है, जिन पर पार्टी की मूल विचारधारा, परंपराओं और सर्वमान्य महापुरुषों के अनादर का गंभीर आरोप लगा है।
प्रमुख बिंदु: क्या है पूरा विवाद?
पोस्टर से दिग्गजों की तस्वीर गायब: शिवसेना के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए हिन्दू हृदय सम्राट आदरणीय बालासाहेब ठाकरे और गुरुवर्य धर्मवीर आनंद दिघे साहेब आदर्श और पार्टी की आत्मा हैं। आरोप है कि महापौर अश्विनी निकम द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक विज्ञापनों और DTP पोस्टरों से इन महान विभूतियों की तस्वीरें नदारद रहती हैं।
प्रोटोकॉल और नियमों की धज्जियां: पार्टी के आंतरिक नियमों और अनुशासन के अनुसार, हर शिवसैनिक के लिए अपने पोस्टरों पर पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व और संस्थापकों का सम्मान करना अनिवार्य है। इसके बावजूद, इसे लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
तीखे सवाल और जनता का आक्रोश: वायरल हो रहे पोस्टरों के माध्यम से यह कड़ा सवाल पूछा जा रहा है कि क्या पप्पु कालानी या ओमी कलानी, बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे साहेब से भी बड़े हो गए हैं, जिनके पोस्टर या नाम को प्राथमिकता दी जा रही है?
नेतृत्व की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि आखिर इस प्रकार की अनदेखी पर स्थानीय नेतृत्व या शीर्ष स्तर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई है? क्या पैसे और रसूख के आगे पार्टी की निष्ठा और विचारधारा बौनी साबित हो रही है?”वाह शिवसैनिकों!
भूल गए ना?… विचार करो, यह शिवसेना की मूल विचारधारा है या सिर्फ स्वार्थ की दुकान?”
यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस गंभीर मामले पर पार्टी आलाकमान क्या रुख अपनाता है।

