ब्रेकिंग: उल्हासनगर के श्री गुरु गोविंद हिंदी हाईस्कूल में बड़ा शैक्षणिक घोटाला बेनकाब; परविंदर कौर, राजेश सिंह और जया सिंह की धांधली का पर्दाफाश


शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर स्थित ‘श्री गुरु गोविंद हिंदी हाईस्कूल’ में मुख्याध्यापक पद को हथियाने के लिए रचे गए एक बड़े षड्यंत्र का ठाणे जिला परिषद के शिक्षा विभाग ने भंडाफोड़ किया है। माध्यमिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए गए एक कड़े आदेश ने स्कूल प्रबंधन की मनमानी और धांधली पर बड़ा प्रहार किया है।
क्या है पूरा मामला?
इस स्कूल में लंबे समय से मुख्याध्यापक पद को लेकर विवाद चल रहा था। वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती सुनीता सिंह द्वारा की गई शिकायतों और उच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में, शिक्षा विभाग ने मामले की गहन सुनवाई की। जांच में यह पाया गया कि जया राजेश सिंह को मुख्याध्यापक पद पर नियुक्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों, जाली स्टैंप और गलत तथ्यों का सहारा लिया गया था।
शिक्षा विभाग का कड़ा एक्शन
ठाणे जिला परिषद के माध्यमिक शिक्षा अधिकारी, श्री देवीदास पांडित महाजन ने दिनांक 26 मई 2026 को जारी अपने आधिकारिक आदेश में निम्नलिखित निर्णय लिए हैं:
- नियुक्ति रद्द: जया राजेश सिंह की अवैध और फर्जी मुख्याध्यापक नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।
- प्रभारी की नियुक्ति: शैक्षणिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने और छात्रों के हित को देखते हुए, श्रीमती सुनीता सिंह को तत्काल प्रभाव से ‘अस्थायी प्रभारी मुख्याध्यापिका’ का अधिकार सौंपा गया है।
- प्रबंधन की वैधता पर सवाल: विभाग ने माना है कि संस्था की वर्तमान कार्यकारिणी और पदाधिकारियों (परविंदर कौर मुधर एवं अन्य) की वैधानिकता पर गंभीर सवाल हैं।
- धर्मादाय आयुक्त के रिकॉर्ड के अनुसार, इस संस्था की कोई वैध कार्यकारिणी मौजूद नहीं है।
साजिश का पर्दाफाश
आरोप है कि परविंदर कौर मुधर ने खुद को संस्था की सचिव बताते हुए राजेश सिंह के साथ मिलकर मिलीभगत की। नियमों को ताक पर रखकर एक कनिष्ठ शिक्षिका (जया सिंह) को पदोन्नति देकर सरकारी खजाने से वेतन का गबन किया गया। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि एक गंभीर आपराधिक कृत्य भी है।
पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा के मंदिर की पवित्रता को तार-तार कर दिया है। श्रीमती सुनीता सिंह ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और शिक्षा विभाग को गुमराह करने, फर्जी दस्तावेज बनाने तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में परविंदर कौर मुधर, राजेश सिंह और जया सिंह के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
जनहित में चेतावनी: यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग के साथ धोखाधड़ी और सरकारी धन की लूट का एक स्पष्ट उदाहरण है। संबंधित अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से आग्रह है कि इस मामले में संलिप्त सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लग सके।
[संपादकीय टिप्पणी]: यह रिपोर्ट दस्तावेजों और प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित संज्ञान लेने की आवश्यकता है।








