उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र की समस्याओं पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का हल्लाबोल: प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम।

उल्हासनगर : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र में फैली प्रमुख समस्याओं और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने फिर मोर्चा संभाल लिया है। नैसर्गिक संसाधनों का विद्रुपीकरण, प्राथमिक शिक्षा के अधिकार की अनदेखी, सार्वजनिक निर्माण कार्यों की बदहाली, कॉलेज परिसरों के पास अवैध शराब अड्डों की बेतहाशा वृद्धि और महापुरुषों के स्मारकों की उपेक्षा जैसे गंभीर मुद्दे अब भी प्रशासन के ध्यान से कोसों दूर हैं।
समस्याओं पर प्रशासन की अनदेखी
अभाविप ने इन समस्याओं को लेकर पहले भी 10 अगस्त 2024 को महानगरपालिका आयुक्त श्री विकास ढाकणे को ज्ञापन सौंपा था। लेकिन, समस्याओं को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाने के बजाय प्रशासन ने इन्हें नजरअंदाज कर दिया।
प्रभावी कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय
गंभीर मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग को लेकर अभाविप ने 10 दिसंबर 2024 को फिर से महानगरपालिका आयुक्त से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने सभी समस्याओं की मौजूदा स्थिति और समाधान योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान प्रशासन को अतिरिक्त ज्ञापन सौंपते हुए समस्याओं के समाधान के लिए 15 दिनों की समय सीमा दी गई।
अभाविप का सख्त रुख
अभाविप के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय में इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो संगठन उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा, “यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं और स्वच्छ वातावरण प्रदान करे। यदि इसमें और देरी हुई, तो अभाविप बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।”
जनता का समर्थन जुटा रहा है अभाविप
अभाविप के इस कदम को जनता का भी समर्थन मिल रहा है। नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से इन समस्याओं को लेकर शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता से स्थिति और खराब होती जा रही है।
क्या कहता है प्रशासन?
महानगरपालिका आयुक्त श्री विकास ढाकणे ने अभाविप के ज्ञापन को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया है। हालांकि, इस बार प्रशासन इन मुद्दों पर किस तरह की कार्रवाई करता है, यह देखने वाली बात होगी।
अभाविप की चेतावनी के बाद प्रशासन अलर्ट
अभाविप के आंदोलन की चेतावनी के बाद प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है। आने वाले 15 दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और अभाविप की अगली रणनीति तय करेगी कि यह आंदोलन कहां तक जाएगा।