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बड़ी खबर: उल्हासनगर की 16 मंजिला ‘झलक पैराडाइज’ पर चलेगा हथौड़ा; हाई कोर्ट ने बिल्डर की याचिका की खारिज

शौर्य टाईम्स  : नीतू विश्वकर्मा

उल्हासनगर शहर में अवैध निर्माण और नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई बहुमजली इमारतों के खिलाफ प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। शहर की सबसे ऊंची इमारतों में शुमार ‘झलक पैराडाइज’ (बैरक नं. 2112, उल्हासनगर-5) को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने बिल्डर द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए इमारत को पूरी तरह जमींदोज करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

झलक कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा निर्मित इस 16 मंजिला इमारत में कुल 65 फ्लैट और 4 दुकानें हैं। प्रहार जनशक्ति पक्ष द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, यह इमारत शहर के डेवलपमेंट प्लान (DP) रोड पर अवैध रूप से खड़ी की गई है। जांच में पाया गया कि इमारत का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा 36 मीटर के रिंग रोड और 24 मीटर के डीपी रोड की सीमा में आता है।

कोर्ट का सख्त रुख और आदेश

बुधवार को मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री गडकरी और श्री कमल काथा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए बिल्डर के सभी दावों को खारिज कर दिया। टाउन प्लानिंग (TP) विभाग द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में स्पष्ट किया गया कि यह निर्माण सड़क के विकास में बड़ी बाधा है।

  • पिछला संदर्भ: अगस्त 2024 में तत्कालीन आयुक्त अजीज शेख ने इसे तोड़ने का आदेश दिया था, जिस पर बिल्डर ने स्थगन (Stay) लिया था।
  • ताजा आदेश: हाई कोर्ट ने अब इस अवैध निर्माण को पूरी तरह हटाने का आदेश दिया है। अब यह जिम्मेदारी वर्तमान मनपा आयुक्त मनिषा आव्हाले पर है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें।

भ्रष्ट अधिकारियों पर भी गिर सकती है गाज

रिपोर्ट्स के अनुसार, तत्कालीन टीपी अधिकारी प्रकाश मुले द्वारा नियमों की अनदेखी कर इस निर्माण को मंजूरी दी गई थी। कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है जिन्होंने मिलीभगत कर इस अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया।

सार्वजनिक सूचना एवं सतर्कता (Public Awareness)

यह घटना उन सभी फ्लैट धारकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो बिना उचित दस्तावेजों और डीपी रोड की जानकारी के घर खरीदते हैं।

  • खरीदने से पहले जांचें: सुनिश्चित करें कि इमारत डीपी रोड या किसी आरक्षित भूखंड (Reserved Plot) पर तो नहीं है।
  • अधिकृत नक्शा: केवल रेरा (RERA) पंजीकृत और मनपा से स्वीकृत नक्शे वाली इमारतों में ही निवेश करें।
  • भविष्य का जोखिम: बिल्डर की गलतियों का खामियाजा अंततः निर्दोष खरीदारों को भुगतना पड़ता है, जैसा कि झलक पैराडाइज के 65 परिवारों के साथ हो रहा है।

अब देखना यह होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका इस 16 मंजिला ढांचे को गिराने की प्रक्रिया कब शुरू करती है, या बिल्डर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है।


स्रोत: बॉम्बे हाई कोर्ट आदेश (रिट याचिका संख्या 14342/24), उल्हासनगर मनपा आधिकारिक रिपोर्ट।

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