उल्हासनगर में होली का रंग-बिरंगा उत्सव या नशे की खतरनाक पार्टी?उल्हासनगर की होली में ‘रंग बरसे’ के साथ ‘गांजा और दारू’ बरसने की आशंका! परिवारों और बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, पुलिस-एक्साइज पर सख्त कार्रवाई की मांग

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
होली का त्योहार रंग, खुशी, मिठाई और ठंडाई का प्रतीक है, लेकिन उल्हासनगर में कुछ आयोजनों में यह उत्सव नशे की भयावह पार्टी में बदलता नजर आ रहा है। विशेषकर वित्तलवाड़ी पेट्रोल पंप के पास रेजिडेंसी गार्डन्स (रेसीडेंसी गार्डेंस) में 3-4 मार्च को होने वाले होली कार्यक्रम में पिछले साल की तरह इस बार भी शराब, भांग के साथ-साथ इंपोर्टेड गांजा (वीड) के खुले इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, उल्हासनगर में आयोजित होने वाले इन ओपन गार्डन और रिसॉर्ट होली इवेंट्स में परिवारों के साथ छोटे बच्चे और महिलाएं भी शामिल होते हैं। लेकिन पिछले साल की एक घटना ने सबको हिला कर रख दिया था—एक नशे में धुत्त व्यक्ति ने छोटी बच्ची के सिर पर शराब की बोतल फोड़ दी थी, जिससे उसकी आंख जाते-जाते बची। ऐसे में सवाल उठता है—क्या ऐसे माहौल में बच्चे और महिलाएं सुरक्षित रह पाएंगे?
नशे का खुला बाजार और गैंग्स्टर्स का खेल
उल्हासनगर में हाल के वर्षों में इंपोर्टेड गांजा (बैंकॉक से लाया गया वीड) का व्यापार बड़े पैमाने पर फैल गया है। कई युवा गैंग्स के सदस्य एयरपोर्ट पर पकड़े जा चुके हैं, जबकि लोकल गैंग्स खुले आम सप्लाई कर रहे हैं। होली जैसे बड़े आयोजनों को इन गैंग्स नशे के डीलिंग के लिए परफेक्ट मौका मानते हैं। छोटे-छोटे बच्चे और युवा बिना सोचे-समझे दारू और गांजा के शिकार हो सकते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ी की सेहत और भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
पुलिस और अधिकारियों पर सवाल?
कई संगठन इन कार्यक्रमों को सार्वजनिक रूप से आयोजित करते हैं, लेकिन क्या इनमें शराब और नशे पर कोई रोक-टोक है? एक्साइज डिपार्टमेंट, लोकल पुलिस स्टेशन, कल्याण डिवीजन के एसपी श्री शिंदे, उल्हासनगर के पुलिस इंस्पेक्टर पाटिल/जाधव आदि अधिकारियों से सवाल है—क्या कुछ पैसों के लालच में ऐसे कार्यक्रमों को परमिशन दी जा रही है? अगर इनके अपने बच्चे ऐसे माहौल में जाते, तो क्या वे इजाजत देते?
आवाज उठाने का वक्त
होली खुशी का त्योहार है, न कि नशाखोरी और दुर्घटना का अड्डा। लोकल पुलिस को ऐसे आयोजनों पर सख्ती बरतनी चाहिए, परमिशन रोकनी चाहिए और लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना चाहिए। अभिभावकों को भी सतर्क रहना होगा—अपने बच्चों को ऐसी जगहों पर अकेले या बिना निगरानी के न भेजे।
क्या उल्हासनगर की होली अब ‘रंग बरसे’ से ‘नशा बरसे’ बन गई है? समय है कि समाज और प्रशासन मिलकर इस खतरनाक ट्रेंड को रोके, ताकि त्योहार सुरक्षित और सुखद रहे!




