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उल्हासनगर हिराघाट बोट क्लब घोटाला: सार्वजनिक संपत्ति पर प्राइवेट ठेकेदारों का कब्जा? आरटीआई में नया खुलासा – 8,000 रुपये रोजाना भाड़ा, फिर भी भुगतान कहां?

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा

उल्हासनगर महानगर पालिका (UMC) के अंतर्गत आने वाले हिराघाट बोट क्लब (उल्हासनगर-3, पैनल नंबर 10) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। RTI के माध्यम से हुए खुलासे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एडवोकेट विशाल प्रकाश गिडवानी द्वारा दाखिल सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन के जवाब में पालिका ने स्पष्ट किया कि हिराघाट बोट क्लब एक सार्वजनिक संपत्ति है। प्रशासनिक निर्णय के अनुसार, इसे आम नागरिकों को प्रतिदिन 8,000 रुपये के भाड़े पर उपलब्ध कराया जा सकता है।


जमीनी हकीकत ने खड़े किए सवाल

हालांकि, स्थल निरीक्षण के दौरान स्थिति कुछ और ही बयां करती नजर आई। बोट क्लब परिसर में बड़ी मात्रा में डीब्रिज (कचरा), पानी के पाइप, जेसीबी मशीनें, डंपर गाड़ियां और अन्य भारी उपकरण पाए गए।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, यह सामान निजी ठेकेदारों का है। वहीं कुछ पाइप पालिका के वॉटर सप्लाई विभाग से जुड़े बताए जा रहे हैं, लेकिन वहां वर्तमान में कोई कार्य संचालित नहीं हो रहा है।

गूगल अर्थ (Google Earth) की तस्वीरों के अनुसार, यह सामग्री पिछले एक वर्ष से अधिक समय से उसी स्थान पर पड़ी हुई है।


मुख्य सवाल जो उठ रहे हैं

क्या निजी ठेकेदार रोजाना 8,000 रुपये का भाड़ा पालिका को अदा कर रहे हैं?

यदि नहीं, तो अब तक हुए लाखों रुपये के नुकसान की भरपाई कब होगी?

सार्वजनिक संपत्ति को निजी गोदाम के रूप में उपयोग करने की अनुमति किसने दी?

क्या पालिका किसी दबाव में आकर भाड़ा वसूली नहीं कर रही है?


गरीब परिवारों के हित में अपील

एडवोकेट विशाल गिडवानी ने इस मुद्दे को सामाजिक दृष्टिकोण से भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि यह स्थान नियमों के अनुसार उपलब्ध कराया जाए, तो गरीब परिवार कम खर्च में विवाह एवं अन्य शुभ कार्य यहां संपन्न कर सकते हैं।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि

“पालिका स्पष्ट रूप से बताए कि इस संपत्ति का वास्तविक उपयोग क्या है और यदि भाड़ा लिया जा रहा है तो उसका प्रमाण प्रस्तुत करे।”


RTI जवाब बनाम वास्तविकता

RTI में जहां बोट क्लब को सार्वजनिक संपत्ति बताते हुए भाड़े की स्पष्ट दर निर्धारित की गई है, वहीं जमीनी स्तर पर निजी उपयोग की स्थिति इस दावे पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

यदि बिना भाड़ा वसूले इस संपत्ति का उपयोग किया जा रहा है, तो यह न केवल राजस्व की हानि है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का संकेत भी है।


जनता की प्रमुख मांगें

स्थानीय नागरिकों और RTI कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि:

बोट क्लब परिसर को तुरंत अतिक्रमण और सामग्री से मुक्त कराया जाए

बकाया भाड़ा वसूला जाए

आम नागरिकों, विशेषकर गरीब परिवारों के लिए इसे विवाह एवं सामाजिक कार्यक्रमों हेतु उपलब्ध कराया जाए


चेतावनी और निष्कर्ष

एडवोकेट विशाल गिडवानी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।

यह मामला अब एक अहम सवाल खड़ा करता है—
क्या हिराघाट बोट क्लब वास्तव में जनता के उपयोग के लिए है, या फिर निजी ठेकेदारों के कब्जे में एक गोदाम बनकर रह गया है?

Shaurya Times

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