उल्हासनगर मनपा में वृक्ष प्राधिकरण समिति गठन: सरकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाई? कानूनी विवाद की आशंका बढ़ी




शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर महानगरपालिका (उमनपा) की महासभा में आज वृक्ष संरक्षण के लिए वृक्ष प्राधिकरण समिति (ट्री अथॉरिटी) के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन शिवसेना पक्ष द्वारा प्रस्तावित सदस्यों की सूची पर सरकारी नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप लग रहा है। विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया अवैध हो सकती है, जिससे शहर के पर्यावरण संरक्षण पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
शिवसेना द्वारा प्रस्तावित सदस्यों की सूची
शिवसेना की ओर से नामित सदस्य इस प्रकार हैं:
श्री अरुण आशान, श्रीमती चरणजीत भुल्लर, श्रीमती राजश्री चौधरी, श्रीमती दुर्गा राय, श्रीमती कविता मनोज लास्सी, श्री अनिल मराठे, श्रीमती समिधा कोरडे और श्री अक्षय सोनवणे।
छह साल की लापरवाही और नियमों की अनदेखी
उल्हासनगर में वृक्षों की कटाई-छंटाई, संरक्षण और संबंधित शिकायतों के निपटान के लिए वृक्ष प्राधिकरण समिति का गठन छह वर्ष से लंबित है। इस दौरान शहर में पुराने पेड़ गिरने, अवैध कटाई और पर्यावरणीय अव्यवस्था की कई घटनाएं सामने आई हैं।
वर्ष 2020 में उमनपा ने गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सदस्यों के लिए विज्ञापन जारी किया था, लेकिन महाराष्ट्र (शहरी क्षेत्र) वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1975 के 2021 संशोधन के अनुसार निर्धारित योग्यताएं पूरी न होने के कारण समिति नहीं बन सकी। इन योग्यताओं में शामिल हैं:
- कृषि या संबंधित विषय में डिग्री/डिप्लोमा
- वृक्ष संवर्धन में न्यूनतम 5-10 वर्ष का अनुभव
- केंद्रीय स्तर के एनजीओ से जुड़ाव
- सामाजिक वानिकी विभाग में सक्रिय भूमिका
2021 का विवाद फिर लौटा
वर्ष 2021 में भी नियमों की अनदेखी कर समिति गठित करने का प्रयास किया गया था, जिसका हिराली फाउंडेशन की अध्यक्षा श्रीमती सरिता खानचंदानी ने तीखा विरोध किया। उनके हस्तक्षेप के बाद प्रक्रिया रुक गई थी। अब 2026 में एक बार फिर बिना उचित प्रक्रिया और योग्यता जांच के समिति बनाने का प्रयास हो रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं।
उमनपा आयुक्त वर्तमान में वृक्ष प्राधिकरण के पदेन प्रमुख हैं। उनकी भूमिका अब निर्णायक मानी जा रही है। यदि वे बिना नियमों का पालन किए सदस्यों को मंजूरी देते हैं, तो यह सीधे सरकारी प्रावधानों का उल्लंघन होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
उल्हासनगर जैसे औद्योगिक शहर में वृक्ष संरक्षण न केवल पर्यावरणीय संतुलन बल्कि नागरिक स्वास्थ्य और शहरी नियोजन के लिए अत्यंत जरूरी है। बिना योग्य विशेषज्ञों वाली समिति से अवैध कटाई को बढ़ावा मिल सकता है, पुराने वृक्षों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और शहर की हरित क्षेत्र कम हो सकते हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का सवाल: क्या उमनपा विकास के नाम पर कानून की अनदेखी कर रही है? क्या यह गठन पूर्णतः अवैध है? यदि आयुक्त नियमों का पालन नहीं करते तो क्या हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी?
यह मामला न केवल उल्हासनगर बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए मिसाल बन सकता है। उमनपा प्रशासन पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शी, कानूनसम्मत और योग्य सदस्यों वाली समिति गठित कर शहरवासियों का विश्वास बहाल करे। अन्यथा, कानूनी और सार्वजनिक विरोध तेज होने की पूरी संभावना है।








