उल्हासनगर: राधे श्याम गौशाला विवाद पर संत स्वामी देवप्रकाश महाराज का बड़ा बयान— “मुझ पर कोई दबाव नहीं, सारे आरोप बेबुनियाद, शांति बनाए रखें”

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर: शहर की सुप्रसिद्ध राधे श्याम गौशाला को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे विवाद और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक अफवाहों के बीच आज एक बड़ा और निर्णायक मोड़ आया है। उल्हासनगर के पूज्यनीय एवं प्रतिष्ठित संत स्वामी देवप्रकाश महाराज जी ने अस्पताल में उपचाराधीन अवस्था में ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनके ऊपर किसी भी प्रकार का कोई बाहरी दबाव नहीं है और गौशाला ट्रस्ट को लेकर लगाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह से निराधार, व्यर्थ एवं भ्रामक हैं।
🚨 पूरा मामला : हिल लाइन पुलिस की पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
जानकारी के अनुसार, ‘सकल हिंदू समाज’ की ओर से पुलिस प्रशासन को एक आधिकारिक अर्जी (शिकायत पत्र) सौंपी गई थी। इस अर्जी में गंभीर आरोप लगाए गए थे कि राधे श्याम गौशाला ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री जेठा भाई ने स्वामी देवप्रकाश महाराज जी पर मानसिक एवं शारीरिक दबाव बनाकर उनसे जबरन ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ बनवा ली है। इसके अलावा अर्जी में यह भी सनसनीखेज दावा किया गया कि स्वामी जी को अस्पताल में जबरन रोककर रखा गया है, उनकी जान को खतरा है तथा उनके साथ धोखाधड़ी और छल किया जा रहा है।
इन गंभीर आरोपों की सत्यता की जांच के लिए आज हिल लाइन पुलिस थाना के दो पुलिस कांस्टेबल अस्पताल में उपचाराधीन स्वामी देवप्रकाश महाराज जी के पास पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने स्वामी जी से सीधे सवाल-जवाब किए और उनके बयान दर्ज किए। स्वामी जी ने अत्यंत शांत, धैर्यपूर्ण एवं स्पष्ट शब्दों में सभी आरोपों का कड़ा खंडन किया, जिससे पुलिस को स्थिति की वास्तविकता समझ आ गई।
📢 स्वामी देवप्रकाश महाराज जी का स्पष्ट बयान
पुलिस और उपस्थित सेवादारों के समक्ष स्वामी देवप्रकाश महाराज जी ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट किया—
🔹 “मुझ पर कोई भी दबाव नहीं है”
“मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मुझ पर किसी भी ट्रस्टी या किसी अन्य व्यक्ति का कोई दबाव नहीं है। जो भी मेरे और गौशाला ट्रस्ट के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से लांछन हैं, झूठे हैं। इनमें कोई सच्चाई नहीं है।”
🔹 “अपनी मर्जी से करा रहा हूँ इलाज— इलाज उत्कृष्ट है”
“मैं अपनी पूरी आज़ादी और इच्छा से इस अस्पताल में अपना इलाज करवा रहा हूँ। यहाँ मेरा उपचार अत्यंत स्तरीय और सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। डॉक्टरों और स्टाफ ने मेरा बहुत अच्छा ख्याल रखा है। मैं शीघ्र ही पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर आप सभी के बीच लौटूंगा।”
🔹 “सारे आरोप व्यर्थ और भ्रामक हैं”
“आजकल सोशल मीडिया और शहर के कुछ लोग राधे श्याम गौशाला को लेकर भ्रामक बातें फैला रहे हैं। कृपया इन पर ध्यान न दें। ये सब आरोप बिना किसी ठोस आधार के हैं और इनमें कोई दम नहीं है।”
🙏 भक्तों व सेवादारों से शांति बनाए रखने की अपील
स्वामी देवप्रकाश महाराज जी ने अपने अनुयायियों, गौशाला सेवादारों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे शांति, सौहार्द एवं सद्भाव बनाए रखें। उन्होंने कहा कि जो सेवादार पिछले कई वर्षों से गौशाला में निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं, वे आगे भी उसी समर्पण के साथ अपनी सेवा जारी रखें। किसी भी सेवादार को कोई परेशानी या असुविधा नहीं होनी चाहिए।
स्वामी जी का मुख्य उद्देश्य गौ सेवा और गौशाला के प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाना है। किसी भी प्रकार की राजनीति या विवाद से बचते हुए सभी को मिलकर गौशाला की सेवा में जुटना चाहिए।
🏛️ हिल लाइन पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
हिल लाइन पुलिस ने स्वामी देवप्रकाश महाराज जी का आधिकारिक बयान दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, स्वामी जी के बयान में कहीं भी किसी प्रकार का संदेह या विसंगति नहीं पाई गई। पुलिस अधिकारी इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए शहर में शांति व्यवस्था पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
पुलिस ने सभी पक्षों से अनुरोध किया है कि इस मामले में शांत रहें और किसी भी तरह की जल्दबाजी में आकर गलत कदम न उठाएँ। यदि किसी के पास इस संबंध में कोई वैध साक्ष्य या ठोस शिकायत है, तो वह पुलिस को सौंपें, जिसकी जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी।
ज्ञात हो कि उल्हासनगर में राधे श्याम गौशाला विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही थीं। कुछ लोगों द्वारा भड़काऊ पोस्ट, वीडियो और संदेश वायरल किए जा रहे थे, जिससे शहर में तनाव की स्थिति निर्मित हो रही थी। स्वामी देवप्रकाश महाराज जी के इस स्पष्टीकरण के बाद अब सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर रोक लगने की उम्मीद है।
📌 आम जनता को हिदायत— सावधानी बरतें, अफवाहों से बचें
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट, फॉरवर्ड किए गए संदेश या बिना प्रमाणित वीडियो पर विश्वास न करें। सत्यता की पुष्टि केवल आधिकारिक सूत्रों और पुलिस के नोटिस से ही करें। कानून व्यवस्था को हाथ में लेना या अफवाहों को बढ़ावा देना दंडनीय अपराध है।




