उल्हासनगर में स्विमिंग पूल के नाम पर ‘अवैध वसूली’: नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर वसूला जा रहा है मनमाना शुल्क!


शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर: शहर के प्रतिष्ठित स्विमिंग पूल में आम नागरिकों को भारी आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम (UMC) के नियमों और 2003 के मूल अनुबंध की शर्तों की अनदेखी करते हुए, वर्तमान में इस प्रोजेक्ट का संचालन कर रही ‘विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा नागरिकों से निर्धारित दर से कई गुना अधिक शुल्क वसूला जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
उल्हासनगर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (UMC) और ठेकेदार के बीच 19 दिसंबर 2002 को हुए मूल अनुबंध के अनुसार, स्विमिंग पूल के शुल्क में हर 5 साल में अधिकतम 50% की ही बढ़ोतरी की जा सकती थी। वर्तमान में भले ही प्रबंधन ‘विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड’ के हाथों में हो, लेकिन निगम द्वारा तय की गई दरें आज भी उसी मूल अनुबंध के आधार पर विनियमित हैं।
गणितीय विश्लेषण: नियमों का खुला उल्लंघन
अनुबंध में दी गई शर्तों के अनुसार, शुल्क वृद्धि का चार्ट कुछ इस प्रकार होना चाहिए था:
- 2003 – 2008: 10 रुपये प्रति घंटा
- 2008 – 2013: 15 रुपये प्रति घंटा
- 2013 – 2018: 22.50 रुपये प्रति घंटा
- 2018 – 2023: 33.75 रुपये प्रति घंटा
- 2023 – 2028: 51 रुपये प्रति घंटा (निर्धारित दर)
वर्तमान वर्ष 2026 में, नियमों के अनुसार अधिकतम शुल्क 51 रुपये प्रति घंटा ही होना चाहिए। लेकिन, इसके उलट वर्तमान में नागरिकों से 245 रुपये प्रति घंटा तक का शुल्क वसूला जा रहा है, जो सीधे तौर पर जनता की लूट और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस गंभीर मुद्दे को कई बार संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया है, लेकिन अब तक नगर निगम प्रशासन द्वारा कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
हमारी मांग
- तत्काल जांच: उल्हासनगर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे और वसूली जा रही अतिरिक्त राशि की जांच करे।
- दरों का नियमन: निर्धारित दर (51 रुपये) का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और सूचना पट्ट पर इसे प्रदर्शित किया जाए।
- जवाबदेही तय हो: नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदार पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
यह मामला शहर के आम नागरिकों के हितों से जुड़ा हुआ है। हम प्रशासन, स्थानीय जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और मीडिया से अपील करते हैं कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और जनता को इस अवैध वसूली से राहत दिलाएं।
क्या आपको लगता है कि प्रशासन को इस मामले में ठेकेदार का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट्स में बताएं।
अस्वीकरण: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों और स्थानीय नागरिकों द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है।





